लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सियासी सरगर्मी तेज होने लगी है। इसी बीच बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने चुनावी सर्वेक्षणों को लेकर कड़ा एतराज जताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जातिवादी मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से बसपा को कमजोर दिखाने के लिए फर्जी, प्रायोजित और ध्यान भटकाने वाले सर्वे का प्रचार किया जा रहा है। मायावती ने इसे पार्टी को निशाना बनाने वाला दुर्भाग्यपूर्ण प्रयास बताया।
यूपी, उत्तराखंड और पंजाब के चुनावों का किया जिक्र
मायावती ने शनिवार, 17 अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों के लिए बसपा अच्छे और दमदार उम्मीदवारों के चयन के साथ जमीनी स्तर पर तैयारियां कर रही है। उनका आरोप है कि इसी दौरान कथित तौर पर धनबल का इस्तेमाल करके ऐसे सर्वेक्षणों का प्रचार किया जा रहा है, जिनमें बसपा की स्थिति को कमजोर दिखाया जा रहा है।
बसपा प्रमुख ने कहा कि चुनाव से पहले इस तरह के सर्वे और प्रचार से मतदाताओं का ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने पार्टी को निशाना बनाए जाने पर नाराजगी जताते हुए इसे दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण बताया। हालांकि, सर्वेक्षणों को लेकर लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
2007 की जीत का उदाहरण देकर विरोधियों को दिया संदेश
मायावती ने अपने बयान में वर्ष 2007 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस समय भी बसपा को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे थे और पार्टी की राजनीतिक ताकत को कम करके आंका जा रहा था, लेकिन नतीजों ने इन अनुमानों को गलत साबित कर दिया था। उस चुनाव में बसपा ने पूर्ण बहुमत हासिल कर सरकार बनाई थी।
उन्होंने अपनी पिछली सरकार का उल्लेख करते हुए कानून के राज और ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की नीति को भी याद किया। मायावती के इस बयान को आगामी चुनाव से पहले पार्टी के समर्थकों और कार्यकर्ताओं में उत्साह बनाए रखने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
समर्थकों से की पांचवीं बार सरकार बनाने की अपील
बसपा प्रमुख ने उत्तर प्रदेश की जनता, विशेषकर बहुजन समाज के लोगों से अपील की कि वे विरोधी दलों और कथित जातिवादी तत्वों के दुष्प्रचार से सावधान रहें। उन्होंने सपा और भाजपा के शासन से असंतुष्ट लोगों से बसपा के साथ जुड़ने तथा पार्टी को मजबूत बनाने के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
मायावती ने समर्थकों से उत्तर प्रदेश में बसपा की पांचवीं बार सरकार बनाने के लक्ष्य के साथ पूरी ताकत से जुटने की अपील की। उनके इस बयान से साफ है कि पार्टी आगामी विधानसभा चुनावों से पहले अपने संगठन को सक्रिय करने और अपने राजनीतिक आधार को मजबूत करने पर जोर दे रही है।
आकाश आनंद भी संभालेंगे चुनावी मोर्चा
चुनावी तैयारियों के बीच बसपा के नेशनल कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद की सक्रियता भी बढ़ने वाली है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, वह 28 अक्टूबर से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जनसभाओं की शुरुआत करेंगे। इसके बाद उत्तर प्रदेश के अन्य क्षेत्रों के साथ उत्तराखंड और पंजाब में भी पार्टी के कार्यक्रमों में हिस्सा लेने की योजना है।
ऐसे में आने वाले दिनों में बसपा की चुनावी रणनीति, उम्मीदवारों के चयन और जनसभाओं को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है। अब देखना होगा कि मायावती का यह संदेश पार्टी के कार्यकर्ताओं और मतदाताओं पर कितना प्रभाव डालता है और आगामी चुनाव में बसपा किस तरह अपनी स्थिति मजबूत करती है।
मायावती ने चुनावी सर्वेक्षणों को लेकर सवाल उठाते हुए बसपा को कमजोर दिखाने की कथित कोशिशों का विरोध किया है। उन्होंने 2007 की जीत का हवाला देकर समर्थकों से दुष्प्रचार से सावधान रहने और 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटने की अपील की है।






