भगत सिंह की जयंती की पूर्व संध्या पर हुई गोष्ठी
बदायूं में शहीद भगत सिंह की जयंती की पूर्व संध्या पर रविवार को जनहित सत्याग्रह मोर्चा की ओर से डॉ. भीमराव आंबेडकर पार्क में विचार गोष्ठी आयोजित की गई।
गोष्ठी में वक्ताओं ने भगत सिंह के क्रांतिकारी विचारों और उनके सामाजिक-आर्थिक चिंतन को याद करते हुए वर्तमान परिस्थितियों में उनकी प्रासंगिकता पर चर्चा की।
मेहनतकशों की एकता पर जोर
मोर्चा अध्यक्ष प्रेमपाल सिंह ने कहा कि भगत सिंह के विचार आज भी सामाजिक और आर्थिक मुद्दों पर चर्चा का आधार बनते हैं। उन्होंने कहा कि मेहनतकश समुदाय को जाति और धर्म के आधार पर विभाजित होने के बजाय एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए आवाज उठानी चाहिए।
उन्होंने भगत सिंह के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने की बात कही और उनके समाजवादी चिंतन का उल्लेख किया।
सामाजिक बराबरी और शोषण के मुद्दे पर चर्चा
कृष्ण गोपाल गुप्ता ने कहा कि भगत सिंह मानव द्वारा मानव के शोषण के विरोधी थे। उनके अनुसार भगत सिंह ऐसे समाज की कल्पना करते थे जिसमें भेदभाव के लिए जगह न हो।
वहीं आरके जौहरी ने वर्तमान सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए गरीबी, बेरोजगारी और महंगाई जैसे मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि भगत सिंह देश के संसाधनों में मजदूरों और किसानों की भागीदारी के पक्षधर थे।
भगत सिंह के विचारों को लेकर रखे विचार
विचार गोष्ठी में वक्ताओं ने भगत सिंह के समाजवादी विचार, सामाजिक समानता और मेहनतकश वर्ग से जुड़े उनके चिंतन पर चर्चा की।
भगत सिंह के लेखन में समाजवाद और सामाजिक शोषण जैसे विषयों पर उनके विचार मिलते हैं। उनके लेख ‘मैं नास्तिक क्यों हूँ’ में भी समाजवाद और शोषण से मुक्ति से जुड़े विचार व्यक्त किए गए हैं।
इन लोगों ने की सहभागिता
कार्यक्रम में प्रेमपाल सिंह, कृष्णगोपाल गुप्ता, आरके जौहरी, डॉ. सतीश, देवेंद्र सिंह, चरन सिंह यादव और राकेश सिंह सहित कई लोगों ने अपने विचार रखे और शहीद भगत सिंह को नमन किया।







