13 महीने की सुनवाई, 126 पेशियां और 22 गवाहों के बयान के बाद आया फैसला; हत्या के बाद नीले ड्रम में छिपाया गया था शव
मेरठ। देशभर में सुर्खियां बटोरने वाले सौरभ राजपूत हत्याकांड में बुधवार को अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मृत्युदंड की सजा सुनाई। नीले ड्रम में शव छिपाने की सनसनीखेज वारदात के इस मामले में अभियोजन पक्ष ने दोनों दोषियों के लिए फांसी की मांग की थी। अदालत के फैसले के साथ ही करीब 13 महीने तक चली सुनवाई के बाद मामले में सजा का ऐलान हो गया।
पति की हत्या कर शव को नीले ड्रम में छिपाने का मामला
यह मामला मर्चेंट नेवी से जुड़े सौरभ राजपूत की हत्या से संबंधित है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, मार्च 2025 में मेरठ में सौरभ की हत्या की गई थी। इसके बाद शव के टुकड़े करके उन्हें नीले प्लास्टिक के ड्रम में रखा गया और सीमेंट व रेत की मदद से छिपाया गया। घटना का खुलासा होने पर पुलिस ने जांच शुरू की और मुस्कान रस्तोगी तथा साहिल शुक्ला को गिरफ्तार किया।
वारदात के खुलासे ने लोगों को झकझोर दिया था। शव को ड्रम में छिपाने के तरीके के कारण यह मामला देशभर में चर्चित हो गया। पुलिस ने जांच के दौरान परिस्थितिजन्य और फॉरेंसिक साक्ष्यों सहित विभिन्न पहलुओं की पड़ताल की।
126 पेशियों के बाद दोषी ठहराए गए थे दोनों
मामले की सुनवाई करीब 13 महीने तक चली। इस दौरान अदालत में 126 पेशियां हुईं और अभियोजन पक्ष की ओर से 22 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। अभियोजन पक्ष ने अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहियों के आधार पर अपना पक्ष रखा। बचाव पक्ष ने भी आरोपियों की ओर से दलीलें पेश कीं।
30 सितंबर 2026 को जिला अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को हत्या के मामले में दोषी करार दिया था। इसके बाद अदालत ने सजा तय करने के लिए दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को अदालत ने दोनों को मृत्युदंड की सजा सुनाई।
अभियोजन ने की थी फांसी की मांग
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अपराध की गंभीरता और वारदात की परिस्थितियों का हवाला देते हुए दोनों दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की थी। वहीं, बचाव पक्ष ने सजा में नरमी बरतने की अपील करते हुए पारिवारिक परिस्थितियों और बच्चों के भविष्य का मुद्दा उठाया था। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सजा पर फैसला सुनाया।
फैसले के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया अहम
मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने के बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। कानून के तहत ऐसे मामलों में उच्च न्यायालय की पुष्टि और अपील से संबंधित प्रक्रिया लागू होती है। इसलिए अदालत द्वारा सजा सुनाया जाना और उसका अंतिम रूप से लागू होना अलग-अलग चरण हैं।
सौरभ राजपूत हत्याकांड में आया यह फैसला एक बार फिर देशभर में चर्चा का विषय बन गया है। मामले में पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग लंबे समय से उठ रही थी। अब आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर नजर रहेगी।






