26 हजार रुपये निश्चित मानदेय, 30 दिन का काम और राज्य कर्मचारी का दर्जा देने की मांग
बदायूं। मानदेय और सुविधाओं में बढ़ोतरी समेत विभिन्न मांगों को लेकर बुधवार को आशा संगिनियों ने स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उत्तर प्रदेश आशा संगिनी वर्कर्स यूनियन की जिला इकाई ने जिलाध्यक्ष सुधा रानी के नेतृत्व में मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगों को प्रमुखता से उठाया। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
यूनियन पदाधिकारियों ने कहा कि आशा संगिनियां स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न योजनाओं और अभियानों को गांव-गांव तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इसके बावजूद उन्हें अपेक्षित मानदेय और सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। संगठन का कहना है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, लखनऊ स्तर पर कई बार अपनी मांगें उठाने और धरना-प्रदर्शन करने के बावजूद समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हुआ है।
मानदेय में बढ़ोतरी को लेकर सबसे ज्यादा नाराजगी
संगठन ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और पंचायत सहायकों के मानदेय में वृद्धि की गई है, लेकिन आशा संगिनियों के मानदेय में बढ़ोतरी को लेकर अभी तक कोई शासनादेश जारी नहीं हुआ है। इसे लेकर आशा संगिनियों में रोष है। यूनियन ने सरकार से आशा संगिनियों के मानदेय में 20 प्रतिशत वृद्धि अथवा 26 हजार रुपये निश्चित मानदेय निर्धारित करने की मांग की।
24 नहीं, पूरे 30 दिन का काम और मानदेय मांगा
ज्ञापन में आशा संगिनियों को वर्तमान 24 दिनों के बजाय पूरे 30 दिन का कार्य और मानदेय दिए जाने की मांग की गई। साथ ही अन्य विभागों के सुपरवाइजरों की तरह आशा संगिनियों को भी सुविधाएं और सम्मानजनक मानदेय उपलब्ध कराने की मांग उठाई गई।
300 से बढ़ाकर 700 रुपये हो विजिट भत्ता
यूनियन के मुताबिक सुपरविजन कार्य के दौरान आशा संगिनियों को करीब 40 किलोमीटर तक की दूरी तय करनी पड़ती है। इसके बावजूद वर्तमान में 300 रुपये प्रति विजिट भत्ता मिलता है। संगठन ने इसे बढ़ाकर 700 रुपये प्रति विजिट किए जाने की मांग की।
राज्य कर्मचारी का दर्जा देने की मांग
आशा संगिनियों ने खुद को राज्य कर्मचारी का दर्जा देने की मांग भी उठाई। इसके साथ ही किसी आशा या आशा संगिनी की मृत्यु होने की स्थिति में उसके आश्रित को नौकरी और 10 लाख रुपये की वार्षिक वित्तीय सहायता दिए जाने की मांग ज्ञापन में शामिल की गई।
कटौती पर रोक और लिखित जानकारी की मांग
संगठन ने भुगतान में होने वाली अकारण कटौती पर रोक लगाने की मांग करते हुए कहा कि यदि किसी आशा संगिनी के भुगतान में कटौती की जाती है तो इसकी लिखित जानकारी संबंधित संगिनी को दी जाए। मोबाइल रिचार्ज के लिए मिलने वाली 250 रुपये की राशि बढ़ाकर 350 रुपये करने तथा आशाओं के लिए 21 हजार रुपये निश्चित मानदेय निर्धारित करने की मांग भी रखी गई।
स्मार्टफोन और अलग कमरे की भी मांग
आशा संगिनियों ने ई-कवच एप पर कार्य करने के लिए सभी आशाओं और आशा संगिनियों को स्मार्टफोन उपलब्ध कराने की मांग की। इसके अलावा सीएचसी और पीएचसी पर आशाओं के ठहरने के लिए अलग कमरे की व्यवस्था किए जाने की मांग भी की गई।
यूनियन ने सीएमओ से मांगों को गंभीरता से लेते हुए शासन स्तर पर प्रभावी पैरवी कर जल्द समाधान कराने का अनुरोध किया। पदाधिकारियों ने कहा कि आशा संगिनियां स्वास्थ्य सेवाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रही हैं, इसलिए उनकी समस्याओं की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।
संगठन ने साफ चेतावनी दी कि यदि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आशा संगिनियां आंदोलन को और तेज करने के लिए बाध्य होंगी।






