बदायूं। राजकीय मेडिकल कॉलेज की चिकित्सा व्यवस्था, प्रशासनिक कामकाज और निर्माण कार्यों को लेकर भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) ने गंभीर सवाल उठाए हैं। भाकियू के मंडल प्रवक्ता राजेश कुमार सक्सेना ने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाओं की उच्चस्तरीय जांच कराने और सुधारात्मक कार्रवाई की मांग की है।
ज्ञापन में संगठन की ओर से आरोप लगाया गया है कि मेडिकल कॉलेज में प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावी नहीं है और मरीजों को अपेक्षित चिकित्सा सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। भाकियू ने इन शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराकर दोष पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
अस्पताल को 'रेफरल सेंटर' बनाने का आरोप
भाकियू का आरोप है कि गंभीर मरीजों के उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज में पर्याप्त और प्रभावी व्यवस्थाएं नहीं हैं। संगठन के मुताबिक गंभीर मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद उच्च चिकित्सा केंद्रों के लिए रेफर किया जाता है। ज्ञापन में ट्रॉमा सेंटर की व्यवस्थाओं की भी जांच कराने की मांग की गई है।
निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल
ज्ञापन में मेडिकल कॉलेज की इमारत में निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए गए हैं। संगठन ने दावा किया कि कुछ स्थानों पर फॉल्स सीलिंग गिरने और डॉक्टरों के चैंबर में पानी टपकने जैसी समस्याएं सामने आई हैं। भाकियू ने निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराने और यदि अनियमितता सामने आए तो संबंधित ठेकेदारों व अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
डॉक्टरों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल
भाकियू ने मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों के बीच कथित गुटबाजी और आपसी विवाद के भी आरोप लगाए हैं। संगठन का कहना है कि ऐसी स्थिति का असर अस्पताल की कार्यप्रणाली और मरीजों की सुविधाओं पर पड़ सकता है। ज्ञापन में पूरे मामले की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाने की मांग की गई है।
निजी प्रैक्टिस और दवाओं को लेकर गंभीर आरोप
ज्ञापन में कुछ डॉक्टरों पर कथित रूप से निजी प्रैक्टिस करने और मरीजों को बाहर से महंगी दवाएं लिखने के आरोप भी लगाए गए हैं। भाकियू ने दवाओं की खरीद-बिक्री और मरीजों को लिखी जा रही दवाओं की जांच कराने की मांग की है। संगठन ने कमीशनखोरी के आरोपों की भी स्वतंत्र जांच की मांग की है।
विशेष जांच टीम गठित करने की मांग
भाकियू के मंडल प्रवक्ता राजेश कुमार सक्सेना ने मुख्यमंत्री से मांग की कि मामले की जांच के लिए लखनऊ से उच्चस्तरीय टीम भेजी जाए। संगठन के अनुसार जांच में मेडिकल कॉलेज के निर्माण कार्य, वित्तीय मामलों, चिकित्सा सुविधाओं, डॉक्टरों की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक व्यवस्था को शामिल किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए, ताकि मेडिकल कॉलेज में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।
गौरतलब है कि राजकीय मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाओं को लेकर इससे पहले भी शिकायतें और विरोध सामने आते रहे हैं। 2023 में भी भाकियू के मंडल प्रवक्ता राजेश कुमार सक्सेना ने मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाओं, डॉक्टरों की उपलब्धता और बाहर से दवाएं लिखे जाने को लेकर विरोध जताया था।
फिलहाल पूरे मामले में मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।






