व्यापारियों ने आठ सूत्रीय ज्ञापन केंद्रीय वित्त मंत्री को भेजा, बैंक अवकाश, कैश हैंडलिंग चार्ज और एनपीए नियमों में बदलाव की मांग
बदायूं। बैंकों द्वारा व्यापारियों के उत्पीड़न और बैंक खातों पर विभिन्न प्रकार के शुल्क लगाए जाने के विरोध में उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल उत्तर प्रदेश ने आवाज उठाई है। संगठन के प्रांतीय आह्वान पर जिलाध्यक्ष नवनीत गुप्ता शोंटू के नेतृत्व में व्यापारियों के प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर एसडीएम न्यायिक कुमार चंद्र के माध्यम से केंद्रीय वित्त मंत्री भारत सरकार को संबोधित आठ सूत्रीय ज्ञापन प्रेषित किया। ज्ञापन में बैंकिंग नियमों में व्यापारियों के हित में बदलाव करने और विभिन्न शुल्क समाप्त करने की मांग की गई।
जिलाध्यक्ष नवनीत गुप्ता शोंटू ने कहा कि व्यापारियों को बैंकिंग संबंधी कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। बैंकों के अवकाश के कारण व्यापारिक लेनदेन प्रभावित होता है, जिससे व्यापारियों को परेशानी होती है और राजस्व पर भी असर पड़ सकता है। उन्होंने सरकारी बैंकों को अधिकतम दिनों तक खोलने की व्यवस्था किए जाने की मांग की।
न्यूनतम बैलेंस पेनल्टी समाप्त करने की मांग
ज्ञापन में कहा गया कि बचत खातों पर कम ब्याज मिलता है, जबकि चालू खातों पर ब्याज नहीं दिया जाता। इसके बावजूद न्यूनतम बैलेंस बनाए न रखने पर जुर्माना लगाया जाता है। व्यापार मंडल ने न्यूनतम बैलेंस पेनल्टी समाप्त करने की मांग की। साथ ही चेक बाउंस होने की स्थिति में भुगतान प्राप्त करने वाले व्यापारी पर चार्ज लगाने के बजाय केवल चेक जारी करने वाले के विरुद्ध शुल्क लगाए जाने की मांग रखी गई।
कैश हैंडलिंग और अकाउंट मेंटेनेंस चार्ज खत्म हों
व्यापार मंडल ने नकदी जमा करने और निकालने पर लगाए जाने वाले कैश हैंडलिंग चार्ज को अनुचित बताते हुए इसे समाप्त करने की मांग की। ज्ञापन में कहा गया कि व्यापारी चालू खातों में जमा राशि पर ब्याज नहीं पाते और ऋण या कैश क्रेडिट लिमिट पर बैंक को ब्याज भी देते हैं। ऐसे में नकदी के लेनदेन पर अतिरिक्त शुल्क लगने से व्यापारियों पर आर्थिक बोझ बढ़ता है। संगठन ने विभिन्न प्रकार के अकाउंट मेंटेनेंस चार्ज समाप्त करने की भी मांग की।
लोन नवीनीकरण और एनपीए नियमों में बदलाव की मांग
ज्ञापन में कहा गया कि ऋण या लिमिट स्वीकृत करते समय बैंक संपत्ति के दस्तावेजों की कानूनी जांच और मूल्यांकन कराते हैं। इसके बावजूद हर वर्ष नवीनीकरण और संपत्ति के पुनर्मूल्यांकन के नाम पर व्यापारियों से अतिरिक्त खर्च वसूला जाता है। संगठन ने नियमित रूप से चल रहे खातों में अनावश्यक खर्च कम करने की मांग की।
इसके अलावा व्यापार मंडल ने ऋण और लिमिट खातों को एनपीए घोषित करने की समयसीमा तीन माह से बढ़ाकर छह माह करने तथा तकनीकी कारणों से खाता प्रभावित होने पर व्यापारी को सुधार का अवसर देने की मांग की। संगठन का कहना है कि इससे व्यापारियों को अपना कारोबार संभालने का समय मिलेगा और बैंक व ग्राहक के बीच अनावश्यक विवाद भी कम हो सकते हैं।
केवाईसी की अवधि दस वर्ष करने का प्रस्ताव
व्यापार मंडल ने केवाईसी के लिए खाताधारकों को बार-बार बैंक बुलाए जाने पर भी आपत्ति जताई। संगठन ने केवाईसी की अवधि बढ़ाकर दस वर्ष किए जाने के संबंध में आदेश जारी करने की मांग की। ज्ञापन में व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए बैंकिंग नीतियों को सरल बनाने और अनावश्यक शुल्कों से राहत देने की अपील की गई।
ये रहे मौजूद
इस दौरान जिला महामंत्री हाजी राशिद सैफी, जिला उपाध्यक्ष विनय गुप्ता, सौरभ तोमर, पवन वैश्य, नगर अध्यक्ष राजेश गुप्ता, नगर महामंत्री संजय रस्तोगी, जमील अहमद, अकमल सैफी, सौरभ गुप्ता सहित अन्य व्यापारी मौजूद रहे।






