क्या हुआ?
बदायूं में उत्तर प्रदेश सड़क परिवहन निगम के रोडवेज डिपो में कर्मचारियों के लिए स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया गया। शिविर में चालक और परिचालकों को एचआईवी/एड्स के प्रति जागरूक किया गया तथा उनकी सामान्य स्वास्थ्य जांच के साथ एचआईवी, सिफलिस और नेत्र परीक्षण की सुविधा उपलब्ध कराई गई।
शिविर के दौरान कुल 103 चालक-परिचालकों की एचआईवी और सिफलिस जांच की गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार सभी कर्मचारियों की एचआईवी रिपोर्ट नॉन-रिएक्टिव रही, जबकि सिफलिस जांच में एक कर्मचारी की रिपोर्ट रिएक्टिव मिली।
कहां आयोजित हुआ स्वास्थ्य शिविर?
स्वास्थ्य शिविर उत्तर प्रदेश सड़क परिवहन निगम के बदायूं डिपो में आयोजित किया गया। शिविर में कर्मचारियों को स्वास्थ्य संबंधी जानकारी देने के साथ जांच और आवश्यक दवाओं की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई।
कब हुआ कार्यक्रम?
कार्यक्रम का आयोजन 18 सितंबर 2026 को किया गया। उपलब्ध विवरण में इसे शुक्रवार का शिविर बताया गया है।
कौन-कौन शामिल रहे?
शिविर का आयोजन उत्तर प्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण सोसायटी के तत्वावधान में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला क्षय रोग अधिकारी ने की, जबकि एआरएम राजेश पाठक ने शिविर का उद्घाटन किया।
शिविर में चिकित्साधिकारी डॉ. विक्रम सिंह पटेल, परामर्शदाता सुषमा सिंह, लैब टेक्नीशियन सौरभ सक्सेना, नेत्र सर्जन डॉ. उत्पल रस्तोगी, फार्मासिस्ट प्रशांत सिंह, एसटीएस सुदेश सक्सेना, एसटीएलएस शाहिद हुसैन, एसटीआई परामर्शदाता राजीव कुमार और आउटरीच वर्कर सुनील कुमार सहित अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।
लोक स्मृति सेवा संस्थान के परियोजना प्रबंधक सनी दुबे ने शिविर को सफल बनाने में सहयोग करने वाले सभी लोगों का उल्लेख किया।
शिविर में क्या-क्या सेवाएं दी गईं?
शिविर में कर्मचारियों की सामान्य स्वास्थ्य जांच के अलावा:
- एचआईवी परीक्षण
- सिफलिस परीक्षण
- नेत्र परीक्षण
- सामान्य स्वास्थ्य परामर्श
- आवश्यक सामान्य दवाओं का वितरण
- एचआईवी/एड्स के प्रति जागरूकता
- 70 लोगों का सेल्फ रिस्क असेसमेंट
जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई गईं।
अभी क्या स्थिति है?
जांच के दौरान 103 चालक-परिचालकों की HIV और सिफलिस जांच की गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार HIV जांच में सभी रिपोर्ट नॉन-रिएक्टिव रहीं। वहीं, सिफलिस की स्क्रीनिंग में एक कर्मचारी की रिपोर्ट रिएक्टिव मिली।
संबंधित कर्मचारी की STI परामर्शदाता राजीव कुमार ने काउंसलिंग की और चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार दवा लेने तथा नियमित उपचार की सलाह दी गई। कर्मचारी की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि “रिएक्टिव” स्क्रीनिंग परिणाम को सीधे अंतिम बीमारी की पुष्टि के रूप में नहीं लिखा जाना चाहिए। आगे की चिकित्सकीय जांच और डॉक्टर के परामर्श से स्थिति स्पष्ट होती है।
आगे क्या होगा?
स्वास्थ्य शिविर के बाद संबंधित कर्मचारी को चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उपचार और फॉलोअप जारी रखने की सलाह दी गई है। वहीं, ऐसे स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से रोडवेज कर्मचारियों में एचआईवी/एड्स सहित अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के प्रति जागरूकता और समय पर जांच को बढ़ावा देने का प्रयास जारी रहेगा।





