वजीरगंज में दलित समाज के पुनर्निर्माण पर संवाद
बदायूं के वजीरगंज ब्लॉक में नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ दलित एंड आदिवासी ऑर्गनाइजेशंस (NACDAOR) की ओर से दलित समाज की एकता, सशक्तिकरण और सामाजिक रूपांतरण को केंद्र में रखकर दलित राउंड टेबल का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ताओं, कर्मचारियों, जनप्रतिनिधियों, युवाओं और विभिन्न सामाजिक समूहों से जुड़े लोगों ने भाग लिया। संवाद के दौरान दलित समाज के सामने मौजूद सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों के साथ-साथ शिक्षा, रोजगार, संवैधानिक अधिकार और सामाजिक सम्मान जैसे विषयों पर विचार रखे गए।
शिक्षा और कौशल विकास को बताया प्राथमिकता
सामाजिक कार्यकर्ता कमलेश कुमारी ने कहा कि दलित समाज का पुनर्निर्माण केवल समस्याओं पर चर्चा करने से संभव नहीं होगा। इसके लिए शिक्षा, संगठन, आर्थिक आत्मनिर्भरता और सामाजिक सम्मान को मजबूत करना जरूरी है।
NACDAOR से आईं सुमेधा बौद्ध ने शिक्षा को पहली प्राथमिकता बताते हुए कहा कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, डिजिटल ज्ञान और कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाना चाहिए। इससे युवा अपने अधिकारों के साथ रोजगार और नेतृत्व के अवसरों तक भी पहुंच बना सकेंगे।
आर्थिक आत्मनिर्भरता और रोजगार पर चर्चा
संवाद में युवाओं, महिलाओं और छोटे उद्यमियों को कौशल प्रशिक्षण, रोजगार, स्वरोजगार तथा सरकारी योजनाओं की जानकारी और वास्तविक लाभ पहुंचाने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई।
वक्ताओं ने कहा कि सरकारी योजनाओं और उपलब्ध अवसरों की जानकारी केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि जरूरतमंद लोगों तक पहुंचनी चाहिए।
संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूकता पर जोर
NACDAOR से आए लाडी भारती ने सामाजिक एकता और संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि जातिगत भेदभाव और सामाजिक असमानता जैसी चुनौतियों का सामना कानून, लोकतांत्रिक संवाद और सामूहिक जागरूकता के माध्यम से किया जाना चाहिए।
दिल्ली से आए अधिवक्ता रवि ने महिलाओं और युवाओं की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि जब महिलाएं और युवा निर्णय लेने की प्रक्रिया में आगे आते हैं तो सामाजिक बदलाव को स्थायित्व मिल सकता है।
गांव-गांव संवाद की जरूरत बताई
सामाजिक कार्यकर्ता रूप किशोर ने कहा कि बदायूं में गांव-गांव और मोहल्ले-मोहल्ले संवाद की व्यवस्था विकसित करने की जरूरत है, ताकि लोग अपनी समस्याओं को खुलकर सामने रख सकें और मिलकर समाधान तलाश सकें।
उन्होंने सरकारी योजनाओं, संवैधानिक अधिकारों और शिक्षा से जुड़े अवसरों की जानकारी समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने पर भी जोर दिया।
संविधान के मूल्यों को आधार बनाने की बात
कार्यक्रम के अंत में सामाजिक कार्यकर्ता कमलेश कुमारी ने कहा कि संविधान के मूल्यों—समानता, स्वतंत्रता, न्याय और बंधुत्व—को आधार बनाकर ही दलित समाज का मजबूत और सम्मानजनक पुनर्निर्माण संभव है।
उन्होंने कहा कि यह कार्य किसी एक व्यक्ति का नहीं है, बल्कि शिक्षित युवाओं, महिलाओं, बुजुर्गों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के सामूहिक प्रयास से आगे बढ़ सकता है।
ये लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम में पूर्व जिला पंचायत सदस्य ओमप्रकाश जाटव, कमल किशोरी आंगनबाड़ी कार्यकत्री, श्वेता सिंह पंचायत सहायक, फूल सिंह शिक्षा मित्र मनवा, नाथू देवी आशा, राजू आजाद अनुदेशक, श्रवण कुमार प्रधान, लटूरी लाल रोडवेज परिचालक, नरेश पाल सफाई कर्मचारी, अमर सिंह भूतपूर्व बीटीसी मेंबर, सामाजिक कार्यकर्ता प्रेम किशोर पेपल, हरिनंदन बरखेड़ा, सुरेश पाल सिंह मवेशी डॉक्टर, अनीता देवी समूह अध्यक्ष क्रांति, कुमकुम, शिवानी और रीना समेत अन्य लोग शामिल हुए।
युवा भीम आर्मी टीम की ओर से रौनक कुमार, राहुल कुमार, निखिल और आशीष समेत अन्य युवाओं ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।









