बदायूं। राष्ट्रीय रैबीज नियंत्रण कार्यक्रम के सफल संचालन और रैबीज की रोकथाम को लेकर मंगलवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विकास शर्मा की अध्यक्षता में अंतर्विभागीय समन्वय बैठक आयोजित की गई। बैठक में स्वास्थ्य विभाग के साथ पशुपालन, नगर निकाय, शिक्षा और पंचायती राज विभाग के अधिकारियों एवं प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. मोहम्मद तहसीन ने कहा कि रैबीज उन्मूलन के लिए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। उन्होंने कार्यक्रम की प्राथमिकताओं और सामुदायिक स्तर पर जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया। बैठक का संचालन एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ. कौशल गुप्ता ने किया।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विकास शर्मा ने कहा कि रैबीज एक जानलेवा वायरस है, लेकिन समय पर उचित उपचार और बचाव के उपायों से इससे बचाव संभव है। उन्होंने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए, ताकि जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में रैबीज के मामलों की रोकथाम प्रभावी तरीके से की जा सके।
जिला सर्विलांस अधिकारी ने बताया कि आवारा कुत्तों के नियंत्रण, बंध्याकरण और रैबीज रोधी टीकाकरण में पशुपालन और नगर निकायों की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके अलावा लोगों को रैबीज से बचाव के प्रति जागरूक करने और सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी-रैबीज वैक्सीन तथा एंटी-रैबीज सीरम की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी चर्चा हुई।
एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ. कौशल गुप्ता ने रैबीज के लक्षणों, संक्रमण के जोखिम और कुत्ते या अन्य संदिग्ध संक्रमित पशु के काटने के बाद किए जाने वाले प्राथमिक उपचार की जानकारी दी।
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. मोहम्मद असलम ने बताया कि किसी भी जानवर के काटने पर घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से कम से कम 15 मिनट तक धोना चाहिए। इसके बाद बिना किसी अंधविश्वास या देरी के नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर चिकित्सक की सलाह के अनुसार उपचार और रैबीज रोधी टीकाकरण कराना चाहिए।
बैठक में स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारियों के अलावा पशुपालन, शिक्षा और पंचायती राज विभाग के प्रतिनिधि मौजूद रहे। सभी विभागों ने जिले में रैबीज की रोकथाम और नियंत्रण के लिए आपसी सहयोग से कार्य करने का भरोसा दिया।






